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गरिमा सिंह एक ऐसी आईपीएस ऑफिसर हैं, जिनके नाम से बिहार के बड़े-बड़े उग्रवादी डरते हैं। कारण गरिमा ने दर्जनों गुडों को एनकाउंटर में मारा है। 35 वर्षीय इस पुलिस ऑफिसर में अदम्य साहस और आत्मविश्वास है। इस पुलिस ऑफिसर के बारे में पढक़र आप यही सोच सकते हैं कि उनके पेरेंट्स ने अच्छा मार्गदर्शन दिया होगा, लेकिन ऐसा नहीं था गरिमा का जीवन। गरिमा एक साधारण रूढि़वादी परिवार की लडक़ी थीं। अव्वल दर्जे की छात्रा होने के बावजूद उनके माता-पिता ने गरिमा की शादी छोटे कस्बे के एक ग्रेजुएट लडक़े से कर दी। जब वे ससुराल में आगे पढऩे की इच्छा जाहिर की, तो पति और ससुराल वालों ने आगे पढ़ाने से मना कर दिया।

सुबह से रात तक गरिमा घर के कार्यों में जुटी रहती, लेकिन फिर भी घर के सदस्यों द्वारा दहेज के लिए प्रताडि़त की जातीं। इसी तरह एक साल गुजर गया। जब ससुराल वालों को दहेज की रकम नहीं मिली, तो उन्होंने गरिमा को मारपीट कर घर से निकाल दिया। गरिमा अपने पिता के पास आ गई। उन्होंने अपने पिता से साफ श३दों में कहा कि मैं अब ससुराल नहीं जाऊंगी। पापा मैं पढऩा चाहती हूं। पिता के पास पढ़ाने के अलावा और कोई चारा नहीं था। गरिमा ने ग्रेजुएशन कर सिविल सर्विसेज की परीक्षा दी। वे एक आईपीएस ऑफिसर के रूप में चुनी गईं। यह खबर सुनते ही ससुराल वाले गरिमा को लेने आ गए, लेकिन तब तक गरिमा यह तय कर चुकी थीं कि उन्हें अपने जैसी महिलाओं को न्याय दिलाना है। अत: उन्होंने अपने पति से तलाक ले लिया। आज गरिमा को अगर दहेज प्रताडऩा का एक भी केस मिलता है, तो वे उस महिला को न्याय दिलाकर ही रहती है।

भला खूबसूरत कौन-नहीं बनना चाहता। तो इस आम रुचि को अपना कैरियर बना डालिए, ३यूटी पॉर्लर खोलकर……

खूबसूरती की चाहत और फैशन की दौड़ ने ३यूटी पार्लर को एक अच्छा-खासा व्यवसाय बना दिया है। यदि आप में कार्यकुशलता, मेहनत, निष्ठïा और विवेक है तो आप भी कर सकतीं हैं यह व्यवसाय।

व्यवसाय शुरू करने से पहले : इस व्यवसाय को शुरू करने से पहले खुद का मूल्यांकन करें। आपकी रुचि इस क्षेत्र में होनी चाहिए। आपकी शिक्षा ग्रेजुएशन तक होनी चाहिए, ताकि जिन प्रोड०ट्स का आप इस्तेमाल कर रही हैं, उनकी पूरी जानकारी के साथ ही स्वास्थ्य की जानकारी भी होनी चाहिए।

जगह कितनी हो : 10&10 का एक कमरा पार्लर के लिए काफी है। चाहें तो कमरा किराए पर ले सकती हैं या घर के किसी कमरे को पार्लर का रूप दे सकती हैं।

प्रशिक्षण का समय : आमतौर पर स्थापित ३यूटी पार्लर में 3-6 महीने की ट्रेनिंग दी जाती है, जिसमें आपकी हेयर ड्रेसिंग, हेयर कटिंग, ३लीचिंग, मेकअप, पैडी०योर, मैनी०योर, फेशियल, ३यूटी कल्चर थे्रडिंग, मेहंदी, डाई आदि से संबंधित ट्रेनिंग दी जाती है। कोर्स की फीस 7,000-10,000 तक होती है।

सामान ०या रखें : एक आइब्रो चेयर, फेशियल बेड, काउंटर के लिए एक टेबल चेयर, ग्राहकों को बैठने के लिए बेंच या कुर्सियां, बेसिन तथा पानी की व्यवस्था, बड़ा मिरर, हेयर ड्रायर, लाइट की उचित व्यवस्था।

छोटे बड़े कंघे-6, छोटी-बड़ी कैंची-4, एप्रिन-2, तौलिए-4, सौंदर्य प्रसाधन, बालों के सौंदर्य प्रसाधन, मैनी०योर, पैडी०योर करने का सामान, वै०सीन के लिए कॉटन स्ट्रिप्स, आइस बॉ०स, स्टीम पैन, होम विजिट के लिए मेकअप बॉ०स आदि।

समय कितना दें : 12 से शाम 6 बजे का समय उपयुक्त रहता है।

आय और खर्च : शुरुआत में आप एक दिन में 200-300 रु. कमा सकती हैं। साथ ही होम विजिट या ब्राइडल मेकअप करती हैं, तो इससे अतिरिक्त कमाई हो सकती है। ३यूटी पार्लर खोलने पर 15-20 हजार रु. खर्च आता है।

रखें ये सावधानियां

३यूटी पार्लर में प्रायवेसी बनाए करें।
एक महिला की बातें दूसरी महिला से नहीं करें। जैसे उस महिला ने ०या करवाया है।
पार्लर में साफ-सफाई पर ध्यान दें। एप्रेन, तौलिया, चादर, कैंची, कंघा आदि को स्टेरलाइ$ज करें।
पार्लर मैनर तथा एटीकेट्स का ध्यान रखें।
३यूटी प्रोड०ट्स का इस्तेमाल त्वचा को देखकर करें, ०योंकि कैमिकल्स के रिए०शन का डर रहता है। प्रचार कैसे करें अखबारों में विज्ञापन, पर्चे बंटवाना, आसपास की दुकानों पर सूचना चिपकाना व पॉर्लर के आगे बोर्ड लगवाया जा सकता है। यह भी जरूरी इस व्यवसाय मेें बदलते फैशन ट्रेंड के साथ आपको अपनी जानकारी भी अपडेट रखनी होगी। इसके लिए आप सेमिनार में भाग लें। साथ ही किताबों का अध्ययन करें। महानगरों के बड़े ३यूटी पार्लर में कोर्स कर ३यूटी की दुनिया की नई जानकारी हासिल करें।

उदयदानी ने 450 रु. में एक साड़ी खरीदी थी। साड़ी पहनते से ही कलर निकलना शुरू हो गया। उसने दुकानदार से शिकायत की। दुकानवाले ने बताया कि इसे ड्राय०लीन करा दें, तो ठीक हो जाएगा। उन्होंने जब ड्राय०लीनिंग करवाया, तो साड़ी का पूरा रंग उतर गया। वह साड़ी दुकानदार के पास ले गई, तो उसने कहा कि आप साड़ी रख जाएं। कंपनी को भेजेंगे, तब साड़ी वापस होगी, लेकिन उसने पैसे वापस नहीं किए। कुछ दिनों बाद दुकानदार ने कहा कि कंपनी साड़ी वापस नहीं कर रही है। हम दूसरी साड़ी से 250 रु. एडजस्ट कर देंगे। अत: साड़ी बदलकर नहीं देने पर महिला ने उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराई। महिला ने दुकान से साड़ी खरीदने की रसीद, साथ ही ड्राय०लीनिंग की रसीद भी उपभोक्ता फोरम में पेश की, लेकिन साड़ी खरीदने की रसीद पर सन् नहीं लिखा गया था। अत: दुकानदार ने यह आरोप लगाया कि साड़ी सालों पूर्व खरीदी गई थी। अत: इसके लिए कंपनी जिम्मेदार नहीं है। कोर्ट ने यह आदेश दिए चूंकि रसीद पर सन् डालने की जिम्मेदारी दुकानदार की होती है। अत: महिला द्वारा साड़ी वापस किए जाने की रसीद के अनुसार साड़ी खरीदने का सन् 1996 माना जाएगा। उक्त साड़ी का रंग उतार जाने से आवेदक साड़ी की कीमत पाने की अधिकारी है। महिला को 450 रु. दुकानदार ने वापस किए, साथ ही क्षतिपूर्ति के रूप में 50 रु. भी दुकानदार को देना पड़े।

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