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शादी-विवाह समारोह पर लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं, लेकिन एक शादी तब मिसाल बन गई जब वह सिर्फ 51 रुपए और एक नारियल से पूरी हो गई। इतने कम खर्च के बावजूद विवाह पूरी रीति-रिवाज के साथ संपन्न हुआ। नयाखेरा के रतीराम यादव के पुत्र दीपक की शादी छिंदवाड़ा निवासी ममता के साथ तय हुई थी।

शादी के लिए 27 जुलाई का मुहूर्त और सिद्ध बाबा के मंदिर का स्थान तय हुआ। निश्चित तिथि और समय के अनुसार बारात मंदिर में पहुंंची। बारात में दोनोंंं पक्षों के रिश्तेदार सहित 60-70 बाराती शामिल हुए।

बैंडबाजे के नाम पर गब्बर बंशकार का रमतूला बजता रहा। पंडित हरिओम बाबा ने मंत्रोच्चार के बीच फेरे लगवाए। फूल न होने पर पत्तों से ही काम चलाया गया। पत्तों की जयमाला पहनाकर वर-वधु ने एक- दूसरे को अपना जीवन साथी माना।

मंदिर में रखे ढोल की थाप पर बाराती खूब नाचे। मेहमानों को मिठाई के रूप में एक-एक बताशा खिलाया गया। विदाई समारोह से पहले एक नारियल और 11 रुपए मंदिर में चढ़ाए गए। इतनी ही दक्षिणा पंडित को दी।

दस रुपए के बताशे खरीदे, 5 रुपए नाई को, 5 रमतूला वाले को एवं 9 रुपए न्यौछार में दिए गए। इस प्रकार से पूरी शादी 51 रुपए में करा ली गई। दीपक यादव की 51 रुपए में शादी गांव वालों की रजामंदी से हुई है।

उनके पिता रतीराम यादव का कहना है कि बेटे की मामी ने शादी तय करवाई। बेटा मजदूरी करता है। वहीं गांव के बुजुर्ग घनश्याम यादव का कहना है कि शादी की बात मोहल्ले वालों के बीच रखी गई और विचार-विमर्श के बाद अंतिम निर्णय लिया गया।

इसी प्रकार रामकिशोर नायक ने बताया कि रतीराम के पास पैसे नहीं थे इसलिए पंडितजी से सबने बात की और उन्हें ऐसी शादी कराने के लिए रजामंद कर लिया।

नौकरी हो या घर अनुभवी व्यक्ति की तलाश सभी को होती है, क्योंकि जो ज्ञान और अनुभव उसके पास होता है उसका स्थान आधुनिक युग का न तो कोई माध्यम ले सकता है और न आधुनिक पीढ़ी……

वैसे तो यह कहावत सभी जानते हैं, पर शायद सब समझते नहीं। समझते हैं, तो इसका लाभ नहीं उठा पाते, क्योंकि इस कहावत को समझने के लिए भी तो अनुभव चाहिए। अनुभव वह तो सिखाता ही है, जो हम सीखना चाहते हैं, अपितु वह भी सिखाता है, जो हमारे लिए सीखना आवश्यक है।

एक सार्थक जीवन जीने के लिए इस संसार में अनुभव जैसी कीमती ची$ज या तो हम दूसरों के अनुभव से सीखते हैं या फिर समय आने पर स्वयं अपने अनुभव से। जो लोग अपनी आंखें, कान एवं विचारधारा खुली रखते हैं, शीघ्र सीख लेते हैं और वो जो इसके विपरीत हैं, अनुभव का लाभ देर से ले पाते हैं। शिक्षा के क्षेत्र को ही लें।

ऐसी कई कहावतें अथवा शब्द हैं, जिनका अर्थ हम केवल अनुभव से ही सीख पाते हैं न कि सिर्फ उनको जानने से। दैनिक जीवन में जब ऐसे मुहावरे या शब्द उनकी अनुकूल या उपयुक्त परिस्थितियों में उपयोग होते सुनते हैं अथवा स्वयं ध्यान रखकर उपयोग में लाते हैं, तभी इनकी सार्थकता या अर्थ समझ पाते हैं। यही तो अनुभव है।

ऐसे कई शब्द उद्ïघोष और कहावतें हैं, जिनकी प्रासंगिकता किन्हीं विशेष घटनाओं और परिस्थितियों से बेहतर आंकी जा सकती हंै। उदाहरण के तौर पर ‘बंदर के हाथ में उस्तरा’ किसी न किसी अनुभव पर ही आधारित है और इसको अनुभव से ही बेहतर समझ सकते हैं। अब या तो हम उस व्यक्ति के अनुभव के वृतांत से जोडक़र सीखें या स्वयं अपने अनुभव से।

केवल पढ़ लेने से, जान लेने से उस मुहावरे का महत्व या अर्थ सही नहीं जाना जा सकता। ठीक इसी तरह मानव जीवन के भी कई ऐसे अनुउत्तरित प्रश्न, अनुसलझी समस्याएं हैं, जिनको हम यह जीवन व्यतीत करते हुए या जीवन दर्शन द्वारा ही हल कर सकते हैं। अनुभव इसके लिए एक कुंजी है और अनुभव सीखने के लिए आवश्यक है कि आपके अंदर जानने, समझने की तीव्र इच्छा, जिज्ञासा, रुचि एवं अवलोकन दक्षता हो।

ईश्वर ने सबको एक जैसा रूप, मन एवं मस्तिष्क प्रदान किया है, परंतु उपरोक्त गुणों के अभाव के कारण कई लोग अनुभव जैसी अमूल्य एवं अद्ïभुत कला से वंचित हो जाते हैं। ऐसे लोग न तो अपने स्वाभाविक अध्यापकों, जैसे मां-बाप और शिक्षक से कुछ सीख पाते हैं, अपितु अनुभव प्राप्त कर सकते हैं न ही अपने स्वयं के जीवन से।

संसार में शायद ही कोई ऐसी समस्या हो, जिसका समाधान या निदान न हो सके। आवश्यकता है अनुभव एवं योग्य, मार्गदर्शन की या फिर अपने स्वयं के अनुभव की। आज दुनिया में चारों ओर हर विषय एवं वस्तु के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए अति आधुनिक और वैज्ञानिक साधन उपलब्ध हैं। कंप्यूटर यंत्र ने पूरे विश्व में सूचना एवं ज्ञान के क्षेत्र में क्रांति ला दी है।

बा$जार में आज हर विषय पर ज्ञानवर्धक पुस्तकें जगह-जगह मिल रही हैं, मगर इन महत्वपूर्ण, सुलभ एवं सशक्त माध्यमों से अनुभव नहीं प्राप्त कर सकते। ये सारे माध्यम मिलकर भी अनुभव के बिना अधूरे हैं। आज भी अनुभव से कई जटिल समस्याओं एवं कठिन प्रश्नों के सरल समाधान प्राप्त कर सकते हैं।

व्यवसायिक एवं संस्थाओं के प्रबंधन की ही बात करें, तो आज भले ही हर जगह आधुनिक तरीके से शिक्षित एवं संबंधित विषय में निपुण, प्रचलित विधाओं में माहिर नौजवान उपलब्ध हैं, पर यहां भी इन सब योग्यताओं के साथ अनुभव का भी आंकलन किया जाता है। साथ ही हर संस्था में युवाओं के साथ-साथ वरिष्ठï एवं अनुभवी लोग भी काम करते हैं।

ये लोग अपने अनुभव से उन युवाओं को अवगत कराकर उन्हें बेहतर परिणाम हासिल करने के लिए प्रेरित करते हैं। कोई भी ज्ञान, सूचना या गुण हो, अनुभव की अग्निपरीक्षा से होकर न केवल निखरता है, अपितु ज्यादा असरकारक बन जाता है। कंप्यूटर और किताबों से हम कितना ही ज्ञान क्यों न प्राप्त कर लें, अनुभव के बिना सार्थक नहीं बन सकता।

आज के नपे-तुले युग में सूचना एवं ज्ञान का कहां और कितना उपयोग किया जाए और किस तरह इनसे अधिक से अधिक लाभ प्राप्त हो, यह सब अनुभव से ही हासिल किया जा सकता है। हर मनुष्य को अपने जीवन में इस अनमोल अनुभव को प्राप्त करने की ललक अति आवश्यक है। अनुभव से आदमी अपनी हर समस्या से निपट-सुलट सकता है।

अपने व्यक्तित्व एवं गुणों को संवारकर अपनी प्रतिष्ठïा एवं मान-सम्मान में वृद्धि कर सकता है और मानवीय संबंधों एवं रिश्तों को बेहतर तरीके से निभा सकता है। पारिवारिक एवं व्यवसायिक दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन कर सकता है। किसी के भी जीवन में परिस्थितियां सदा अनुकूल नहीं रहतीं, हमेशा सुख, चैन एवं शांति कायम नहीं रह सकती।

उन प्रतिकूल परिस्थितियों में जिस धैर्य, कौशल एवं आत्मबल की आवश्यकता होती है वह आदमी अनुभव से ही प्राप्त कर सकता है और उनका समुचित उपयोग भी। अनुभव वह कला है, जिसके बल पर मनुष्य अपना जीवन सफल एवं अर्थपूर्ण बना सकता है। जो ज्ञान और गुण अनुभव से विकसित होता है, उसका स्थान एवं आधुनिक युग का कोई माध्यम नहीं ले सकता। ठीक उसी तरह, जिस तरह शिक्षा प्राप्त करने के लिए कोई अध्यापक की जगह नहीं ले सकता है। शायद इसीलिए यह मुहावरा प्रचलित हुआ और आज भी प्रासंगिक है कि अनुभव एक अच्छा अध्यापक है।

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