Career in Transport and Management

भारतीय रेलवे देश का सबसे बड़ा उपक्रम है। इंस्टीटयूट ऑफ रेल ट्रांसपोर्ट से कोर्स करके रेलवे व परिवहन क्षेत्र में आकर्षक रोजगार प्राप्त करने में ये पाठयक्रम मददगार हो सकते हैं।

विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे किसी देश के लिए यातायात के साधनों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। इन साधनों में वैसे तो रेल व सड़क दोनों ही मार्गो से होने वाला ट्रांसपोर्ट अहम है लेकिन रेलवे की भूमिका कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है। रेलवे ने काफी हद तक आंतरिक यातायात के साधनों की कमी की भरपाई की है। रेलवे ने ट्रांसपोर्ट के क्षेत्र में लोगों को प्रशिक्षित करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इस संदर्भ में 1964 में स्थापित रेल यातायात संस्थान द्वारा 1977 में तीन पाठयक्रमों की शुरुआत की गई। 2001 में एक और पाठयक्रम आरंभ किया गया।

पाठयक्रम
1. रेल ट्रांसपोर्ट एंड मैनेजमेंट
2. ट्रांसपोर्ट इकोनॉमिक्स एंड मैनेजमेंट
3. मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट (कंटेनराइजेशन) एंड लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट
4. पी.जी. डिप्लोमा इन पोर्ट डेवलपमेंट एंड मैनेजमेंट
पहले तीन एक वर्षीय डिप्लोमा और चौथा दो वर्षीय पी.जी. डिप्लोमा पाठयक्रम हैं। सभी पत्राचार माध्यम से संचालित किए जाते हैं। न्यूनतम योग्यता स्नातक है।

परीक्षा प्रणाली व माध्यम
सभी पाठयक्रमों में छह से लेकर आठ तक मॉडयूल्स हैं और यही अलग-अलग पेपर होते हैं। इनमें उत्तीर्ण होने के लिए कुल अंकों का 40 प्रतिशत व प्रत्येक पेपर में न्यूनतम 35 प्रतिशत अंक अनिवार्य है। पोर्ट मैनेजमेंट में यह क्रमश: 50 प्रतिशत व 40 प्रतिशत है। इसे छोड़कर अन्य सभी में अध्ययन सामग्री हिंदी व अंग्रेजी दोनों ही माध्यमों में उपलब्ध है। परीक्षा केंद्र नई दिल्ली, चेन्नई, मुंबई, लखनऊ व कोलकाता में हैं।

अवसर व संभावनाएं
भारतीय रेलवे देश का सबसे बड़ा उपक्रम है। इसमें रोजगार के नए-नए अवसर लगातार खुल रहे हैं। रेल ट्रांसपोर्ट एवं मैनेजमेंट में डिप्लोमा एएसएम, असिस्टेंट डाइवर, गार्ड, ट्रैफिक कंट्रोलर, सिग्नल मेंटेनर, ट्रैफिक-कॉमर्शियल अप्रेंटिस सहित इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल, ऑपरेटिंग और सिविल इंजीनियरिंग जैसे तकनीकी विभागों में नियुक्ति हेतु एक अतिरिक्त योग्यता है। लौह-इस्पात, कोयला, सीमेंट, उर्वरक आदि जैसे निजी क्षेत्र के उद्योगों में कार्य के लिए भी यह उपयोगी पाठयक्रम है।
टी.ई.एम. डिप्लोमा भी रेलवे के उपरोक्त सभी पदों हेतु एक अतिरिक्त योग्यता है। इसके अलावा परिवहन प्रणाली के समुचित प्रबंधन व विकास के लिए निजी क्षेत्रों में भी काफी संभावनाएं हैं। पिछले कुछ समय में निजी क्षेत्रों में सड़क और जल परिवहन में ट्रैफिक प्लानर व ट्रांसपोर्ट कंट्रोलर की मांग में वृद्धि हुई है।

एम.एम.टी.सी. डिप्लोमा की उपयोगिता कई क्षेत्रों में है। आंतरिक और विदेशी व्यापार में सामानों की ढुलाई के साथ-साथ समय सीमा, गुणवत्ता कायम रखने व सुरक्षा आदि मसलों को भी ध्यान में रखा जाता है। इस जरूरत के हिसाब से कस्टम हाउस एजेंसियों, फ्रेट फारवर्डिग, कार्गो,  शिपर्स व कंटेनर कंपनियों में ऐसे डिप्लोमा होल्डरों की व्यापक मांग है।

अंतरराष्ट्रीय व्यापार में वृद्धि होने से समुद्री परिवहन में भी कई गुना वृद्धि हुई है। हांलाकि आधारभूत ढांचे एवं प्रबंधन के अभाव में अभी भी इसमें अनेक खामियां हैं, जिन्हें दूर करने के लिए पोर्ट डेवलपमेंट मैनेजमेंट में प्रशिक्षित उम्मीदवारों की आवश्यकता होती है। शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, पोर्ट ट्रस्ट ऑफ इंडिया सहित अन्य सार्वजनिक व निजी कार्गो व शिपिंग कंपनियों में भी ऐसे प्रशिक्षित उम्मीदवारों की मांग है।

संस्थान: इंस्टीटयूट ऑफ रेल ट्रांसपोर्ट, रूम न.-17, रेल भवन, रायसीना रोड, नई दिल्ली-110001
फोन न.-23303236, 23303924, 23384005
वेबसाइट:www.irt-india.com

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