मुकेश व अनिल की होड़ से धन वर्षा

मुकेश अंबानी और अनिल ने शेयर मूल्य बढ़ाने के मामले में सेंसेक्स को पीछे छोड़ दिया है। जहां 2007 के साल के आरंभ से अब तक सेंसेक्स 42 फीसदी बढ़ा है, वहीं मुकेश और अनिल की कंपनियों का मार्केट कैप सौ फीसदी से ज्यादा बढ़ा है। सेंसेक्स में सालभर में जितना इजाफा हुआ, उसमें 40 फीसदी योगदान मुकेश और अनिल अंबानी की कंपनियों का है।

धन की बारिश
साल के आरंभ से देखा जाए तो शेयर बाजार 42 फीसदी बढ़ा। मुकेश अंबानी की कंपनियों का बाजार मूल्य 140 फीसदी बढ़ा है, वहीं अनिल अंबानी की कंपनियों का बाजार मूल्य 119 फीसदी बढ़ा। मुकेश के शेयरों का मूल्य 1,99,915 करोड़ रुपए (या 51 अरब डॉलर) है। अनिल के शेयरों का मूल्य 1,60,908 करोड़ रुपए (41 अरब डॉलर) है।

जनवरी से अक्टूबर के बीच सेंसेक्स की बढ़त में 40 फीसदी योगदान अंबानी बंधुओं की तीन कंपनियों- मुकेश की रिलायंस इंडस्ट्रीज और अनिल की रिलायंस एनर्जी व रिलायंस कम्युनिकेशंस का रहा है।

कहां काम, कहां नतीजे:
दिलचस्प बात यह है कि कम महत्वपूर्ण कंपनियों का बाजार मूल्य भी तेजी से बढ़ा। आपने अनिल अंबानी की रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेस (आरएनआरएल) के 10,000 शेयर 2007 के आरंभ में खरीदे होते तो 31 अक्टूबर को आप दस लाख रुपए मुनाफा कमाते। आपने मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर के 1000 शेयर खरीदे होते तो आप 25 लाख रुपए मुनाफा कमाते।

क्या औचित्य:
कुछ समय पहले कम अल्पज्ञात कंपनियों का बाजार मूल्य तेजी से बढ़ने से पता लगता है कि दोनों भाई किस तरह एक दूसरे को पीछे छोड़ने में लगे हैं। अनाग्राम सिक्यूरिटीज के डाइरेक्टर वीके शर्मा आरआईआईएल और आरएनआरएल के बारे में कहते हैं कि कीमतों में इतनी वृद्धि का औचित्य साबित करने वाली कोई सूचना नहीं है।

क्या वजह:
एक ब्रोकर का नजरिया है कि दोनों भाई दुनिया में सबसे अमीर बनना चाहते हैं। ‘अगर अब शेयर तेजी से गिरते हैं तो निवेशकों को भारी नुकसान होगा।’कोटक सिक्यूरिटीज के केतन कारानी इन चिंताओं को खारिज कर देते हैं। ‘मैंने 20 साल के अनुभव में पाया कि बाजार हमेशा सही होता है। अगर विदेशी फंड अरबों डॉलर लेकर निवेश करने आएंगे तो वे सबसे अच्छी कंपनियों में ही धन लगाएंगे।’

मार्केट कैप:
मुकेश की कंपनियों का मार्केट कैप 31 अक्टूबर 2007 को बाजार बंद होते समय 5,19,715 करोड़ रुपए था। अनिल की कंपनियों का मार्केट कैप 2,76,027 करोड़ रुपए था। दोनों ने कुल 7,95,742 करोड़ रुपए बाजार में जोड़े। यह जुलाई 2002 में धीरूभाई अंबानी के निधन के बाद से 16 गुना इजाफा है। जून 2005 में दोनों भाई अलग हुए थे।

उदार निवेशक :
एक ब्रोकर की राय में निवेशक कैश फ्लो की संभावनाओं का आकलन ज्यादा उदारता से कर रहे हैं। रिलायंस पेट्रोलियम और आरएनआरएल के पास कामकाज से कोई आमदनी अब तक नहीं है। आरपीएल को जामनगर में काम शुरू करना बाकी है, लेकिन शेयर 288 फीसदी बढ़ गया है। उसका मार्केट कैप 1,10,835 करोड़ रुपए है, जो एचपीसीएल, बीपीएल और आईओसी के कुल (77,961 करोड़ रुपए) से भी ज्यादा है। एचडीएफसी सिक्यूरिटीज के दीपक जसानी की राय में अंबानी बाजार का मूड भांपने और मूल्य बढ़ाने के तरीकों में माहिर हैं।

कारनामा:
जैसे अनिल अंबानी की रिलायंस एनर्जी एक नई कंपनी अपने भीतर से बना रही है: रिलायंस पावर। जब यह लिस्ट होगी तो इसका मार्केट कैप 64,000 करोड़ रुपए से ज्यादा होगा। यह रिलायंस एनर्जी के मौजूदा 43,000 करोड़ रुपए से भी ज्यादा होगा।

आरएनआरएल अनिल अंबानी की कंपनी है, जो मुकेश अंबानी का गैस व्यवसाय शुरू होने का इंतजार कर रही है। अलग होने के समझौते के अनुसार आरएनआरएल को रिलायंस इंडस्ट्रीज के 18 साल तक गैस उत्पादन का 33 फीसदी मिलेगा। केवल इस साल आरएनआरएल का शेयर 439 फीसदी बढ़ गया है।

आरआईआईएल, बीपीसीएल की चेंबूर रिफाइनरी से रिलायंस की पातालगंगा इकाई तक पाइपलाइन बिछा रही है। उसका शेयर 425 फीसदी बढ़ चुका है। रिलायंस इंडस्ट्रीज भी इस साल 117 फीसदी बढ़ा है।

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