दिल्ली सबसे संपन्न तो झारखंड सबसे गरीब

दिल्ली देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जहां एक फीसदी (0.2 फीसदी) से भी कम लोग निर्धनतम श्रेणी में आते हैं। यहां 69.9 फीसदी लोग सर्वाधिक संपन्न वर्ग के हैं। गरीबी से सबसे ज्यादा त्रस्त राज्य झारखंड है। इस राज्य की आधी आबादी निर्धनतम श्रेणी में आती है। छत्तीसगढ़ में करीब 40 फीसदी लोग गरीब हैं। ये तथ्य राष्ट्रीय परिवार एवं स्वास्थ्य सर्वेक्षण में सामने आए हैं। इस सर्वेक्षण के अनुसार दिल्ली सहित पांच राज्यों को छोड़कर अन्य सभी राज्यों में 2 फीसदी से ज्यादा आबादी निर्धनतम श्रेणी में आती है।

शहर अमीर, गांव गरीब : शहरी क्षेत्रों में तीन फीसदी निर्धनतम और 47.9 प्रतिशत संपन्न वर्ग के हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा क्रमश: 27.7 और 7.4 फीसदी है।

गरीबी की मार राज्य गरीब (फीसदी में) झारखंड 49.6 छत्तीसगढ़ 39.6 उड़ीसा 39.5 मध्यप्रदेश 36.9 उत्तरप्रदेश 25.3 बिहार 28.2 राजस्थान 24.2

यहां चमचमाती संपन्नता राज्य अमीर (फीसदी में) दिल्ली 69.9 गोवा 55.3 पंजाब 48.1 केरल 44.8 मिजोरम 38.8 हिमाचल 35.1 उत्तरांचल 32.8 सिक्किम 32.8

सबसे कम निर्धनतम लोग राज्य आबादी (फीसदी में) दिल्ली 0.2 केरल 1.0 हिमाचल 1.2 पंजाब 1.4 सिक्किम 1.9

गेहूं का हल कीमतें नहीं, उत्पादन बढ़ाने में

सरकार ने गेहूं के समर्थन मूल्य में 150 रुपए की अच्छी खासी वृद्धि की है। कीमतें बढ़ाने से किसान जहां रकबा बढ़ाने को प्रोत्साहित होंगे, वहीं संग्रहण एजेंसियां ज्यादा खरीदी कर पाएंगी।

रबी का मौसम शुरू होने वाला है। इसलिए किसानों को समर्थन मूल्य को लेकर किसी अनिश्चितता का सामना नहीं करना पड़ेगा। गेहूं का समर्थन मूल्य बढ़ाने के कुछ दूसरे कारण भी हैं।

1. गेहूं की दिक्कत यह है कि आयातित गेहूं की पड़तल कीमतें किसानों को मिलने वाली कीमत से काफी ज्यादा रही हैं। आयात इसलिए करना पड़ा कि देश में गेहूं के अभाव का एक वातावरण बन गया है। भारत की अनाज की जितनी जरूरतें हैं, उस हिसाब से कीमतें बढ़ना स्वाभाविक था। भाड़े को जोड़ दिया जाए तो गेहूं काफी महंगा हो गया।

2. गेहूं उत्पादन का लक्ष्य 755 लाख टन रखा गया जो 2006-07 के मुकाबले दस लाख टन भी ज्यादा नहीं है। जब उत्पादन में ही बड़ा इजाफा नहीं होगा तो हम किसानों से गेहूं एजेंसियों के पास लाने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं।

3. दो साल पहले 2004-05 में गेहूं का संग्रहण मूल्य 640 रुपए प्रति क्विंटल था। यह 2007-08 में 1000 रुपए हो गया। करीब 56 फीसदी इजाफा हुआ है। देश के परंपरागत गेहूं उत्पादक इलाकों में भी उत्पादन ठहरा हुआ है।

4. गेहूं का उत्पादन बढ़ाने में संग्रहण मूल्य में इजाफा तभी काम करेगा, जब दूसरे प्रयास भी किए जाएं। एक और हरित क्रांति ही गेहूं का उत्पादन बढ़ा सकती है। सरकार ने अब तक इस बारे में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।

महंगाई बढ़ेगी अगले साल

1. वर्ष 2008 में गेहूं के समर्थन मूल्य 18 फीसदी वृद्धि के बाद 1000 रुपए प्रति क्विंटल किया गया है, लेकिन बाजार भाव 1,010-1,040 रुपए क्विंटल है। ये कीमतें 1100-1200 रुपए हो जाएंगी। 2. गेहूं की कीमतें बढ़ने के कारण आटा, मैदा, बेसन और चने की कीमतों में भी इजाफा होगा।

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