कृषि मंडी को करोड़ों का चूना!

अव्यवस्थित कार्य प्रणाली, सत्ता की दखल व व्यापारियों की मनमानी के चलते पिछले कई वर्षो से करोड़ों रुपए घाटे में चल रही चूरू कृषि मंडी में व्यापार स्थापित किए जाने व मंडी शुल्क की चोरी को रोकने की कवायद शुरू हो गई है।

जिला मुख्यालय पर 1978 में स्थापित कृषि मंडी में आय नहीं होने के कारण सुविधाएं भी नहीं बढ़ पाई। सितंबर माह से मंडी की कार्य प्रणाली में हुए बदलाव के बाद न केवल मंडी शुल्क बढ़ा है, बल्कि व्यापार स्थापित होने की संभावना भी बढ़ी है।

मंडी के रिकार्ड के अनुसार बीते वर्षो में जनप्रतिनिधियों व प्रशासनिक इच्छाशक्ति के अभाव में कृषि जिंस बिना मंडी शुल्क के बाजार में बिकता रहा। रिकार्ड के हिसाब से बीते वर्षो में हुई मंडी शुल्क की चोरी का आंकलन किया जाए, तो घाटा करोड़ों रुपए में जाता है।

हालांकि बीच-बीच में मंडी शुल्क दर्ज है, लेकिन शहर में कृषि जिंस की जितनी खपत व आवक है, उसके मुकाबले बहुत कम है। सितंबर माह में की गई कार्रवाई से मंडी शुल्क के साथ ही कृषि जिंस की आवक भी बढ़ी है। कार्रवाई के तहत मंडी के बिना आबंटन किए हुए गोदामों को सीज किए जाने की भी कार्रवाई की गई।

उल्लेखनीय है कि कृषि जिंस पर 1.60 प्रतिशत मंडी शुल्क लगता है। बीते वर्षो में मंडी शुल्क की हुई चोरी का 1.60 प्रतिशत से आंकलन करने पर करोड़ों रुपए का चूना लग चुका है।

कहां गया मंडी शुल्क
सितंबर माह में हुई मंडी समिति की आय व बोरियों की आवक के हिसाब से बीते वर्षो का आंकलन किया जाए, तो घाटा करोड़ों रुपए में जाता है। रिकार्ड के अनुसार बीते वर्षो का मंडी शुल्क कहां गया, यह भी जांच का विषय है।

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