इलेक्ट्रॉनिक या प्रिंट मीडिया- खबर पर नजर

आज मीडिया का हर तरफ जबरदस्त क्रेज है-चाहे वह इलेक्ट्रॉनिक या प्रिंट मीडिया हो या फिर मोबाइल या इंटरनेट मीडिया। यदि आप में भी खबरों की अच्छी समझ, सबसे आगे रहने का जोश व जज्बा और चुनौतियों से मुकाबला करने का हौसला है, तो यह क्षेत्र आपके लिए बेहतर करियर हो सकता है।

अगर हर रोज चुनौतियों से मुकाबला करने का हौसला है, खबरों की खबर लेने का जज्बा है, सबसे पहले, सबसे आगे और सबसे तेज बने रहने का जोश है, फिर आपको मीडिया में भविष्य बनाने से कोई नहीं रोक सकता। जी हां, आजकल मीडिया में करियर बनाने का जबरदस्त क्रेज है, मगर इससे पहले कि आप भी खबरों पर नजर रखने को अपना लक्ष्य बनाएं, कुछ चीजों को जान लेना जरूरी है। मसलन, मीडिया है क्या? इस क्षेत्र में क्या-क्या संभावनाएं हैं, किस जगह से प्रशिक्षण लेना चाहिए, अपने अंदर किन-किन गुणों को विकसित करने से आपको सफलता मिल सकती है आदि। आइए नजर डालते हैं-मीडिया के विभिन्न आयामों पर। यूं तो मीडिया में प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक जर्नलिज्म, फिल्म, विज्ञापन व पब्लिक रिलेशन्स आदि सभी आते हैं, मगर फिलहाल हम पत्रकारिता से संबंधित क्षेत्रों में संभावनाओं पर ही चर्चा करेंगे। हालांकि इन सभी क्षेत्रों में अवसरों की कोई कमी नहीं है, मगर जरूरत इस बात की है कि आप न सिर्फ एक अच्छे संस्थान से प्रशिक्षण लें, बल्कि टेक्नोलॉजी के इस युग में नई-नई चीजों को सीखने में भी सबसे आगे रहें।

प्रिंट जर्नलिज्म
खबरों का संकलन, संपादन व प्रस्तुत करने की कला ही जर्नलिज्म है। जर्नलिज्म की सबसे पुरानी विधा है-प्रिंट। आज भी खबरों के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए पूरी दुनिया में लाखों-करोड़ों लोग अखबारों या पत्रिकाओं पर ही निर्भर करते हैं। तेजी से बदल रही इस दुनिया में अखबार का तेवर और कलेवर भी बदलता जा रहा है। पहले जिस प्रकार से रिपोर्टिग व एडिटिंग होती थी, उसमें काफी बदलाव आ गए हैं। राजनीतिक घटनाओं, उद्योग व व्यापार जगत की खबरें, मनोरंजन, खेल, स्वास्थ्य व विज्ञान आदि विषयों में विशेषज्ञता हासिल करने से इस क्षेत्र में आपकी महत्ता बढ़ जाती है, इसलिए मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए प्रिंट जर्नलिज्म में सफलता हासिल करने के लिए अपनी रुचि के अनुसार किसी भी क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करना जरूरी है।

इलेक्ट्रॉनिक जर्नलिज्म
खबरों को रेडियो पर सुनने या टीवी पर देखने की सुविधा ने आम जनता के विचारों को प्रभावित करने के अलावा पत्रकारिता को भी एक नई दिशा दी है। खबरों के अलावा सूचना, शिक्षा, मनोरंजन आदि के लिए भी रेडियो व टीवी के क्षेत्र में नए-नए प्रयोग किए जा रहे हैं। जाहिर है, इतने बड़े स्तर पर हो रहे कार्यो के लिए प्रशिक्षित लोगों की जरूरत होती ही है। फिर चाहे एंकर हो या रिपोर्टर या फिर डायरेक्शन, प्रोडक्शन, कैमरा, ग्राफिक्स, एडिटिंग, साउंड इंजीनियरिंग, स्क्रिप्ट राइटिंग या प्रोग्राम रिसर्च से जुड़े लोग-इन सबका सामूहिक प्रयास शामिल होता है।

मोबाइल व इंटरनेट जर्नलिज्म
सूचना तकनीक के इस युग में आम लोगों तक सूचना को कितनी तेजी से पहुंचाया जा सकता है, इसका नजारा इंटरनेट और एसएमएस के इस दौर में देखने को मिल रहा है। न्यूज पोर्टल पर रोजाना जितने हिट्स मिलते हैं, उससे इस बात का पता चलता है कि लोग खबरों की जानकारी हासिल करने के लिए इंटरनेट का बेजा इस्तेमाल कर रहे हैं। राजनीतिक गतिविधियां जाननी हों या फिर व्यापार की खबरों से रूबरू होना हो, क्रिकेट की खबर हो या फिर लाइव स्कोर, राज्यों की खबर हो या फिर फिल्मी गपशप, मोबाइल पर एक खास नंबर (जैसे 7272) के जरिए सब कुछ जान सकते हैं। मोबाइल व इंटरनेट द्वारा नई तरह की पत्रकारिता सामने आई है।

दक्षता व क्षमता
मीडिया में सफल होने के लिए कुछ बुनियादी क्षमताएं जरूरी हैं, जैसे-भाषा पर अच्छी पकड़, संवाद व संप्रेषण में परिपक्वता, जिज्ञासा, निर्भीकता और कड़ी मेहनत करने का हौसला।

कहां से करें कोर्स
देश भर में विभिन्न यूनिवर्सिटीज से पत्रकारिता में ग्रेजुएट व पोस्ट ग्रेजुएट स्तर की पढ़ाई होती है। इसके अलावा कई निजी संस्थानों से भी जर्नलिज्म में डिप्लोमा की डिग्री हासिल की जा सकती है। प्रमुख संस्थान हैं:
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन, जेएनयू कैंपस, नई दिल्ली।
मास कम्युनिकेशन सेंटर, जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली।
जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन, नोएडा।
सिंबायोसिस इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन, पुणे।

अंत में
आपके मन में एक सवाल मन में जरूर उठ रहा होगा कि इस क्षेत्र में नौकरी की शुरुआत कहां से होती है। जहां एक ओर प्रशिक्षु के रूप में करियर की शुरुआत करते हुए 6 से 7 हजार कमा सकते हैं, वहीं अनुभवी पत्रकारों की कमाई लाखों में होती है। कुल मिलाकर अगर लक्ष्य स्पष्ट हो, तो सफलता जरूर मिलती है। करियर का चुनाव करने और उस पर पूरी लगन के साथ मेहनत करने के बाद आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता।

मानवर्धन कंठ
सबसे आगे रहने का जज्बा
मीडिया में करियर बनाने वाले छात्रों को अपने अंदर दो-तीन गुणों को अवश्य विकसित करने चाहिए। चूंकि इस क्षेत्र में नॉलेज का ही खेल होता है, इसलिए विभिन्न विषयों की जानकारी के अलावा समसामयिक मुद्दों को जानने-समझने की ललक होनी चाहिए। नए-नए आइडियाज को सामने लाने, उन पर पूरी मेहनत और ईमानदारी के साथ काम करने का हुनर भी आना चाहिए। सबसे बड़ी बात यह कि चूंकि इस क्षेत्र में कड़ी प्रतिस्पर्धा है, इसलिए सबसे आगे रहने का जज्बा होना जरूरी है।
दीपक चौरसिया (पॉलिटिकल एडिटर, आज तक)

टेक्नोलोजी ने पत्रकारिता को दी एक नई दिशा
जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन के निदेशक श्री अजय उपाध्याय कहते हैं, 21 वीं सदी में नई तरह की पत्रकारिता सामने आई है। रेडियो, टीवी, मोबाइल और इंटरनेट ने पत्रकारिता को एक नई दिशा दी है। और तो और दिन-प्रतिदिन अखबार का स्वरूप भी बदलता जा रहा है। प्रतिस्पर्धा इस तरह बढ़ती जा रही है कि कोई एफआईआर यानी फ‌र्स्ट इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट हासिल करने में सबसे आगे रहना चाहता है, तो कोई खबरों को अलग तरीके से प्रस्तुत करने में। कुल मिलाकर इस क्षेत्र में हर पल चुनौतियों से मुकाबला करने का सिलसिला जारी रहता है। यह पूछने पर कि आखिर पत्रकारिता के इतने सारे संस्थानों में से किस जगह से प्रशिक्षण लेना चाहिए, श्री उपाध्याय कहते हैं, छात्रों को यह देखना चाहिए कि संस्थान के फैकल्टी अच्छे हों, पढ़ाई का उचित माहौल हो और पत्रकारिता सीखने के साथ-साथ प्रायोगिक रूप से उसे लागू करने के अवसर भी प्राप्त हों।
अजय उपाध्याय (निदेशक, जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन)

पत्रकारिता यानी विश्वसनीयता
पत्रकारिता के लिए एक आवश्यक शर्त है- विश्वसनीयता। चाहे प्रिंट हो या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, विश्वसनीयता तभी बरकरार रह सकती है, जब न सिर्फ आपमें सच कहने की निर्भीकता हो, बल्कि सच्चाई जानने की लगन भी और यह तभी संभव है, जब आप अपना होमवर्क पूरी निष्ठा के साथ करने में सक्षम हों। यहां होमवर्क का मतलब है कि आप जिस भी खबर पर काम करें, उसके बारे में आपको अच्छी जानकारी होनी चाहिए। आमतौर पर यह देखा जाता है कि ग्लैमर की वजह से मीडिया का क्षेत्र लोगों को आकर्षित करता है, मगर यहां यह जानना जरूरी है कि सिर्फ जोश से काम नहीं चलता। किसी भी खबर के पीछे की सच्चाई जानने के लिए जी-तोड़ मेहनत करनी पड़ती है। मीडिया की कार्यप्रणाली ही कुछ इस तरह की है कि हर सेकंड आपको न सिर्फ सजग रहना पड़ता है, बल्कि विपरीत परिस्थितियों के लिए भी खुद को तैयार रखना पड़ता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *