अंतरिक्ष में इबादत और दफ्न के कायदे तय

मलेशिया के पहले अंतरिक्ष यात्री अगले माह अंतरिक्ष में जाने वाले हैं इसलिए इस्लाम के हिसाब से इबादत और वुजू के साथ ही अंतरिक्ष में दफ्न किए जाने संबंधी दिशा-निर्देश तय कर दिए गए हैं।

10 अक्टूबर से 11 दिनों के स्पेस मिशन पर जाने के लिए मलेशिया से दो उम्मीदवारों का चयन हुआ है जिसमें एक डॉक्टर और एक आर्मी डेंटिस्ट है। यह दोनों ही मुस्लिम हैं। हालांकि इससे पहले भी मुस्लिम अंतरिक्ष में जा चुके हैं लेकिन यह पहली बार है जब कोई मुस्लिम पिछले हफ्ते से शुरू हुए रमजान के महीने में अंतरिक्ष यात्रा पर जा रहा है।

मलेशिया के इस्लामी विकास विभाग को उम्मीद है कि रमजान के महीने में अंतरिक्ष यात्रा के दौरान भी अंतरिक्ष यात्री रोजा रखेंगे और इस्लाम के नियमों का पालन करेंगे। इसी सिलसिले में 20 पेज की एक बुकलेट में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन में पृथ्वी से अलग परिस्थितियां हैं लेकिन इन कठिन हालात में भी इस्लाम के अनुसार धार्मिक इबादत किया जाना बेहद जरूरी है।

इस बुकलेट में कहा गया है कि चूंकि स्पेस स्टेशन एक दिन में पृथ्वी के 16 बार चक्कर लगाता है इसलिए सैद्धांतिक रूप से मुस्लिम को वहां रहते हुए एक दिन में 80 बार इबादत की रस्म अदा करना होगी लेकिन हालात को ध्यान में रखते हुए निर्देश दिया गया है कि अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की तरह ही एक दिन में पांच बार ही नमाज अदा करना होगी।

इस बुकलेट में कहा गया है कि अगर किसी अनहोनी में मुस्लिम अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में ही दम तोड़ दे तो उसके शव को निर्धारित रस्मों के साथ दफ्न करने के लिए पृथ्वी पर लाया जाना चाहिए लेकिन अगर यह संभव न हो सके तो उसे एक संक्षिप्त रस्म अदायगी के साथ अंतरिक्ष में ही दफ्न किया जाना चाहिए। हालांकि दिशा-निर्देशों में यह नहीं बताया गया है कि अंतरिक्ष में शव को कैसे दफ्न किया जाना चाहिए।

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